चाहे प्राकृतिक आपदा हो, किसानों का मुद्दा हो, बेरोजगारी का प्रश्न हो या स्थानीय रोजगार की समस्या— उत्तराखंड में संकट आते ही लोग दूसरे नेताओं को याद करें या न करें, पर एक नाम यहां भी सबसे पहले याद आता है, हरीश रावत। उनका स्वभाव है कि वे हर समस्या को व्यक्तिगत जिम्मेदारी की तरह लेते हैं। वे राहत कार्यों में स्वयं को शामिल करते हैं, लोगों की मुश्किलों को प्रत्यक्ष रूप से देखते हैं और तत्काल प्रतिक्रिया देते हैं। यही कारण है कि जनता उन्हें नेता नहीं, ‘अपना आदमी’ मानती है।
संकट में सबसे आगे दिखने वाला चेहरा – हरीश रावत








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